Monday, February 10, 2014

एकल साक्षात्कार : श्री राजेन्द्रं प्रसाद वर्मा से चन्द्रशेखर प्रसाद का एक मुलाकात

चन्द्रशेखरप्रसाद का राजेन्‍द्र प्रसाद वर्मा जी (सहायक निदेशक, भारत सरकार,गृह मंत्रालय,राजभाषा विभाग,हिंदी शिक्षण योजना,पुणे-411001) से एक मुलाकात के दौरान हिंदी के सन्दर्भ में हुई चर्चा-परिचर्चा | 
 चन्द्रशेखर प्रसाद : ( प्रश्न पूछते हुए ),
1.   आप उच्यपदस्थ अधिकारी हैं आपको तमाम सरकारी कम –काज करने पड़ते हैं| हिंदी को भारत संघ की राजभाषा बनाने में कौन-कौन सी कठिनाईयां सामने आती है ?
उत्तर: हिंदी को संघ की राजभाषा बनाने में कोई कठिनाई नहीं है क्योंकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार हिंदी तो पहले से ही संघ की राजभाषा है हमें संघ की राजभाषा बनाने की आवश्यकता नहीं है बस आवश्यकता है तो केवल अपनी मानसिकता बदलने की क्योंकि अभी भी हम अपनी भाषा के मामले में स्वतंत्र नहीं हैं। राजभाषा अधिनियम 1963 एवं राजभाषा नियम, 1976 में हिंदी में काम करने के बारे में पहले से ही स्पष् निर्देश हैं कि हमें सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग करना है लेकिन राजभाषा नियम, 1976 पर पूरी तरह से अमल नहीं कर रहे हैं, धारा 3(3) के अंतर्गत 14 दस्तावेजों को किसी भी हालत में द्विभाषी रूप में जारी करना अनिवार्य है लेकिन इस धारा का शतप्रतिशत पालन नहीं हो रहा है यदि हम इन नियमों का अच्छी तरह से पालन करें तो कोई कठिनाई नहीं है |
2.       राजभाषा हिंदी की वर्तमान स्थिति से क्या आप संतुष्ट हैं ?
उत्तर :राजभाषा हिंदी की वर्तमान स्थिति से मैं पूरी तरह से संतुष्‍ट हूं क्‍योंकि मैं अपना शत-प्रतिशत काम हिंदी में करता हूं । मेरा विभाग ही राजभाषा है यदि हम हिंदी में काम नहीं करेंगे तो दूसरों को कैसे प्रोत्‍साहित करेंगे । मेरा कार्यक्षेत्र हिंदी के साथ-साथ तकनीकी का भी है । मैं इस विभाग में 1996 से कार्यरत हूं मैंने अभी तक  अपने कार्यक्षेत्र में तकनीकी को काफी बढ़ावा दिया है । कंप्‍यूटरों में जब से यानि सन् 2000 से यूनिकोड की सुविधा इनबिल्‍ट है तब से आज तक कभी भी दूसरे फोंट/सॉफ्टवेयर में काम करने का प्रशिक्षण ही नहीं दिया है और न ही मैंने काम किया है । अपने प्रशिक्षण केंद्र में यूनिकोड में ही प्रशिक्षण दे रहा हूं किसी तरह की कोई समस्‍या नहीं है ।
3.     हिंदी आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्थापित हो चुकी है लेकिन भारत में आज भी उसे अपनों से सम्मान की आशा निरर्थक सी हो रही है | इस बिषय में आपका क्या कहना है  ?
उत्तर : इसमें कोई शक नहीं है कि हिंदी आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्थापित हो चुकी है आज आप फेसबुक पर देखें तो दिन दिन हिंदी में या अपनी मातृभाषा में प्रयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ती जा रही है जैसा कि मैंने पहले प्रश् के उत्तर में कहा है कि हमारे देश में हिंदी में काम करने के लिए लोगों को केवल सोच/मानसिकता बदलने की आवश्यकता है हम अपने देश की भाषा का निरादर कर किसी विदेशी भाषा का आदर करें यह तो बिल्कुल ही गलत बात है, ऐसा नहीं होना चाहिए
4.      हिंदी का अतीत गौरवशाली वर्तमान समृद्ध और भविष्य उज्जवल रहा है| फिर भी हिंदी में बहुत कुछ करना शेष है | आपकी दृष्टि में वे ऐसे कौन से क्षेत्र हैं जहाँ हिंदी में काम किये जाने की जरुरत है ?
उत्तर :   आपका यह सवाल सही है कि हिंदी में अभी बहुत कुछ करना शेष है । मेरी नजर में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां हमें हिंदी में काम करने की अत्‍यंत आवश्‍यकता है जैसे सबसे पहले विद्यालयों में, महाविद्यालयों में, विश्‍वविद्यालयों में विशेषकर अभियांत्रिकी और विज्ञान के क्षेत्र में और उसके बाद अपने निजी जीवन में हिंदी में काम करने की बहुत आवश्‍यकता है। 
 5.     हिंदी को सबसे ज्यादा किस भाषा से खतरा हैं और हिंदी अपने को उसके सामने कैसे प्रतिस्थापित कर सकती है ?
उत्तर : हिंदी को ही नहीं हमारी समस् भारतीय भाषाओं को सबसे ज्यादा अंग्रेजी से खतरा है। आज की स्थिति में अंग्रेजी हिंदी पर ही हावी नहीं है बल्कि भारतीय भाषाओं पर भी हावी है हमारी सारी भारतीय भाषाएं समान स्तर का दर्जा रखती हैं हमें अपनी भारतीय भाषाओं का विकास करना जरूरी है ताकि कोई विदेशी भाषा हमारी भारतीय भाषाओं को हानि पहुंचा सके
6.     हिंदी भारत कि राजभाषा है लेकिन इसे राजभाषा का रूप नहीं दिया जा सका |आप इसे राष्ट्र भाषा बनाने के पक्ष में हैं कि नहीं  |
उत्तर : इसमें तो कोई शक ही नहीं है कि हिंदी हमारे देश की राजभाषा है इसे तो 14 सितंबर,1949 को ही संघ की राजभाषा घोषित कर दिया गया था और जब से हमारे देश का संविधान लागू हुआ तब से हिंदी भी संवैधानिक रूप से राजभाषा के रूप में लागू हो गई ।
7.    राजभाषा प्रचार-प्रसार में आपके द्वारा किये गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी दें |
उत्तर : मैं एक ग्रुप-ए राजपत्रित अधिकारी होने के नाते अपने कर्तव्‍य को पूरी मेहनत एवं लगन से निभाने के लिए हमेशा तत्‍पर हूं । मैं अपनी तरफ से हमेशा प्रयास करता हूं कि राजभाषा हिंदी में कंप्‍यूटरों में काम करने के लिए यूनिकोड सक्रिय करें और अपने कार्यालय का या निजी काम हिंदी में करे । चाहे वह कार्यालय केंद्रीय कार्यालय के अंतर्गत हो या राज्‍य सरकार के अंतर्गत, बैंक हो या उपक्रम अथवा निकाय अपना सारा काम यूनिकोड में करे । सरकारी कार्यालयों से भारत सरकार की भी यही अपेक्षा है । राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी में काम करने के लिए बहुत सारे सॉफ्टवेयर विकसित करवाए गए हैं जिनका उपयोग करें जैसे कि अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के लिए 'मंत्र-राजभाषा सॉफ्टवेयर', हिंदी में डिक्‍टेशन देने के लिए 'श्रुतलेखन-राजभाषा', भाषा शिक्षण के लिए 'लीला हिंदी प्रबोध, प्रवीण एवं प्राज्ञ सॉफ्टवेयर' 'ई-महाशब्‍दकोश' इन सब सॉफ्टवेयरों का प्रचार-प्रसार करें और अधिक से अधिक उपयोग करें । मैं अपने प्रशिक्षण केंद्र पर केंद्र सरकार के कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कई वर्षों से इन सॉफ्टवेयरों का सफलतापूर्वक प्रशिक्षण दे रहा हूं ।मेरे राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा प्रायोजित 5 पूर्ण दिवसीय हिंदी में बेसिक कंप्‍यूटरों पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालन सफलतापूर्वक कर रहा हूं । मेरे द्वारा 5 पूर्ण दिवसीय कई कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं । इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए नामांकन पुणे के अलावा महाराष्‍ट्र के अन्‍य जिलों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों से ही नहीं बल्कि भारत के विभिन्‍न राज्‍यों से भी प्राप्‍त हुए हैं इनमें हैदराबाद, कोलकाता, केरल, मुंबई, उड़ीसा, भरतपुर क्षेत्र आदि शामिल हैं ।
8.    भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए कंप्‍यूटरों में यूनिकोड कैसे सक्रिय किया जाता है,इस बारे में कृपया विस्‍तार से बताएं ?
उत्तर :  विंडोज एक्‍सपी ऑपरेटिंग सिस्‍टम में यूनीकोड सक्रिय करने की विस्‍तृत जानकारी इस प्रकार है :-
Ø  कंप्‍यूटर शुरू करने के बाद Start  में क्लिक करें ।
Ø  Start  के बाद Settings  सेटिंग में क्लिक करें ।
Ø  Settings के बाद Control Panel  में क्लिक करें ।
Ø  Control Panel  में क्लिक करने के बाद Regional & Languages Options पर क्लिक करें।
Ø  Regional & Languages Options  में क्लिक करने के बाद Languages  ऑप्‍शन पर क्लिक करें ।
Ø  Languages  में क्लिक करने के बाद  Install files for complex script and right ot left languages (including Thai) पर सही का निशान लगाकर Apply  पर क्लिक करें।
यदि आपके कंप्‍यूटर में भारतीय भाषाओं से संबंधित फाइलें पहले से लोड नहीं हैं तो आपका अब आपका कंप्यूटर आपसे Windows XP Professional  की सी.डी.CD ROM Drive में Insert करने के लिए पूछेगा । सी.डी. ड्राइव में Windows XP Professional की सी.डी. को डालते ही संबंधित आवश्‍यक फाइलों को कंप्यूटर स्वतः कॉपी कर लेगा । यदि अपने आप फाइलें कॉपी नहीं होती हैं तो आप ब्राउज करने के बाद विंडोज एक्‍सपी की सीडी में I386 file का PATH दिखा दें । आवश्यक फाइलें लोड होने के बाद कंप्यूटर री-बूट के लिए पूछेगा, कृपया कंप्यूटर को री-बूट करें । ऊपर बताई गई सैटिंग्‍स आपको पहली और आखिरी बार अपने कंप्‍यूटर में करनी है । बार-बार सैटिंग्‍स करने की आवश्‍यकता नहीं है । अब आपका कंप्‍यूटर भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए सक्रिय हो गया है ।
9.  आपने कंप्‍यूटरों में यूनिकोड सक्रिय करने के बारे में विस्‍तृत जानकारी तो दे दी है लेकिन काम करने के लिए अपनी भाषा को कैसे एड करेंगे कृपया इस बारे में अवगत कराएं ?
उत्तर :  कंप्‍यूटरों में काम करने के लिए सारी भारतीय भाषाएं यूनिकोड सक्रिय के साथ ही सक्रिय हो गई हैं आप आपको अपनी पसंद की भाषा या अपनी मातृभाषा में काम करना है तो इसके बारे में जानकारी इस प्रकार है :
कंप्यूटर को रीस्‍टार्ट करने के बाद भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए अब आपको उपर्युक्‍त प्रक्रिया यानी ऊपर बताए गए स्‍टेप 1 से 5 तक को पुनः दोहरान पड़ेगा । इसके लिए अगले स्‍टेप 6 Details विकल्प पर क्लिक करें ।
Details विकल्प का चयन करते ही Text Services and Input Languages की विंडो खुलेगी जिसमें  आप भाषाएं शामिल करने के लिए  Add… बटन पर क्लिक करें ।
स्टेप 7 के रूप में आप  Add Input Languages  की सूची में से Hindi या जिस भाषा में आप काम करना चाहते हैं, उस भाषा  का चयन करें।
स्टेप 8 के रूप में अब आप OK   Apply पर क्लिक करते हुए विंडो से बाहर Desktop  पर आ जाएं। आप पाएंगे कि टास्क बार पर दाईं ओर EN अंकित है। इस संकेत से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपका कंप्‍यूटर किस मोड में है। EN दिखाई दे रहा है तो आप अभी अंग्रेजी मोड में काम कर सकते हैं यदि HI दिखाई दे रहा है तो आप हिंदी में काम कर सकते हैं। इसी प्रकार सभी भाषाओं का एक्‍सटेंशन आपको नीचे टास्‍क बार में दिखाई देगा। आप इस पर क्लिक करते हुए दूसरी भाषा का सीधा चयन कर सकते हैं। यदि आप एक साथ Alt  और  Shift   दबाते हैं तो आपके द्वारा चुनाव की गई भाषा परिवर्तित हो जाएगी। जैसा कि आपने दूसरे सॉफ्टवेयरों में देखा होगा कि Caps Lock, Num Lock या Scroll Lock को दबाते ही भाषा परिवर्तित हो जाती है। Alt  और  Shift  यही काम करता है।
10.    विंडोज विस्‍टा, विंडोज-7 और विंडोज-8 ऑपरेटिंग सिस्‍टम्‍स में यूनिकोड को कैसे सक्रिय करेंगे?
उत्तर :  विंडोज विस्‍टा,विंडोज-7 और विंडोज-8 ऑपरेटिंग सिस्‍टम्‍स में तो पहले से सारी भाषाएं इनबिल्‍ट हैं । इन तीनों सिस्‍टम्‍स में यूनीकोड सक्रिय करने के लिए सीडी की भी आपको आवश्‍यकता नहीं होगी । कंप्‍यूटर भी सीडी की मांग नहीं करता है और न ही री-स्‍टार्ट करना पड़ता है । ऊपर बताई गई विंडोज एक्‍सपी की विधि को अपनाकर चेंज की बोर्ड में जाकर अपनी मनपसंद भाषा का चुनाव Add  में क्लिक करके कर सकते हैं । इन तीनों सिस्‍टम्‍स को अपनी भाषाओं में काम करने के लिए सक्रिय कर सकते हैं ।
      यदि आपको यूनिकोड सक्रिय करने में किसी भी प्रकार की असुविधा होती है या नहीं कर पाते हैं तो कृपया मुझसे व्‍यक्तिगत रूप से या मोबाइल पर बात कर सकत हैं| मोबाइल नं. 9881616896 और 9405846236 है ।
11.      आप पाठकों को संस्कार सुगंध पत्रिका के माध्यम से क्या सन्देश देना चाहेंगे?
उत्तर : पाठकों को संस्‍कार पत्रिका के माध्‍यम से मेरा यही संदेश है कि यह पत्रिका बहुत ही सुंदर है, सरल भाषा में है । इस पत्रिका का कवर, डिजाइन उच्‍च स्‍तर का है । इसमें दिए गए लेखों को अवश्‍य पढ़े और उन पर अमल करें तभी पत्रिका की सार्थकता सिद्ध होगी । पत्रिका के संपादक मंडल और इस पत्रिका से जुड़े समस्‍त महानुभावों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं ।
                                     धन्‍यवाद !

संस्कार सुगंध पत्रिका में प्रकाशित 

© चन्द्रशेखर प्रसाद

Friday, February 7, 2014

इन आखों ने क्या कुछ नहीं देखा है......


जिन आँखों का था मैं सपना, उन नज़रों को बदलते देखा है |
थी जो मेरी महफ़िल की रौनक, उन्हें गैरों के लिए सजते देखा है ||

                           ओ जो देख के हमें, यूँ ही चुप-चाप गुजर जाती है |
                           अपनी आँखों में, उनकी निगाहों को झांकते देखा है || 

खुद से भी ज्यादा जो मुझको प्यारा है, उनको दुश्मन सा जलते देखा है |
मौज-मस्ती व एहसास–ए-मोहब्बत, यादों का कारवां सा बिखरते देखा है ||

          सोने की चिड़िया कहलाने वाले भारत में भी, भूखा-नंगा देखा है |
             सभ्यता संस्कृति में विश्वगुरु भारत को, इंडिया में बदलते देखा है ||

भ्रष्ट नेता-पुलिस-मिडिया छोड़ो, दो बोतल की खातिर जनता को बिकते देखा है |
सीता-राधा-दुर्गा-काली की धरती पर भी, हर रोज नारी की आबरू लुटते देखा है ||

-                                                                                                                                 -    चन्द्रशेखर प्रसाद    



Monday, January 27, 2014

पत्रिकाएं पढ़ें :


सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत से प्रकाशित पत्रिकाएं |
संपादक : चन्द्रशेखर प्रसाद 

http://issuu.com/shekhar.svnit/docs/svnit__sammukh__annual_magazine_201


Sunday, January 26, 2014

विश्व हिंदी दिवस समारोह, 2014 सम्पन्न :

                   सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत के द्वारा वर्ष 2014  में विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन किया गया | इस अवसर पर संस्थान के द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये | 8 जनवरी को स्कूली बच्चों के लिए सुई धागा,नींबू दौड़, गणित दौड़, रस्सी कूद एवं श्रुतलेख  प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | 9 जनवरी को संस्थान के विद्यार्थियों के लिए सुई धागा, श्रुतलेख, मैराथन (विश्व एकता दौड़) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | साथ ही 10 जनवरी को संस्थान में सुबह सुबह घुमाने आने वाले सूरत निवासियों के बीच राजभाषा प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु उनके लिए तेज टहलो प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था| समाजसेवा निमित राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा 10 जनवरी को सुबह रक्त दान शिविर का भी आयोजन किया गया था | इस अवसर पर सूरत निवासी, स्कूली विद्यार्थी व संस्थान परिवार के सभी सदस्यों (छात्र,  शिक्षक, कर्मचारी) के द्वारा बढ-चढ उत्साह देखा गया एवं कुल 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया | सभी ने  अपनी प्रतिभा को उजागर करने की कोशिश की | विजयी प्रतिभागी को चुनने में निर्णायक मंडल को काफी मंथन करना पड़ा और प्रत्येक प्रतियोगिताओ के लिए प्रथम, द्वितीय, तृतीय, एवं दो सांत्वना पुरस्कार  निर्धारित किये गए |


                                 10 जनवरी 2013 को सुवह संदेश लेखन का कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्व हिन्दी दिवस के बारे में जानकारी देना एवं हिन्दी के प्रति जागरुकता लाना | हमारे संस्थान में सुवह टहलने एवं पर्यावरण का  आनन्द लेने के लिये के लिये शहर के कोने कोने से लोग आते हें | संदेश लेखन कार्यक्रम में लोगों से यह कहा गया कि हिन्दी को विश्व पटल पर देखने के लिये आप अपना संदेश लिखें इस कार्यक्रम में सभी लोंगों ने उत्साहित होकर हिस्सा लिया एवं अच्छे अच्छे संदेश लिखे | इस अवसर पर जलपान की व्यवस्था की गयी एवं सभी लोगों को राजभाषा प्रकोष्ठ के द्वारा डिजाइन कि गये नये वर्ष के कैलन्डर भी वितरित किये गये |


                                     10 जनवरी 2013 को सांयकाल विश्व हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया जिसमें संस्थान परिवार के सभी सदस्य मौजूद थे | समारोह मे मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य आयुक्त भविष्य निधि,मंच पर विराजमान थे | इनके अलावा सूरत व संस्थान के निदेशक डॉ. पी. डी. पोरे, कुलसचिव एच.ए.परमार,  एवं का. हिंदी अधिकारी डॉ. के.डी.यादव मंचासीन थे |कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ के साथ स्वागत किया गया तथा कार्यक्रम के शुरुआत सरस्वती वंदना एवं  दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गयी सर्वप्रथम डॉ. के डी यादव ने विश्व हिन्दी दिवस क्यों मनाया जाता है एवं इसका क्या उद्देश्य है इसके बारे में बताया | तद्पश्चात आयोजित कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी इस मौके पर मुख्य अतिथि  ने हिन्दी  की  उपयोगिता के संदर्भ मे कई तथ्यों को प्रस्तुत किया और काम- काज के दौरान हिंदी के महत्वों एवं जरूरतों को भी समझाया | साथ ही कहा  कि  आज की परिस्थितियों में विज्ञान व् हिंदी का विकास दोनों ही महत्वपूर्ण है जो ऐसे कार्यक्रम के द्वारा ही संभव हैउनका मानना है कि हिंदी ही व्यक्ति कि भावनात्मक अभिव्यक्ति को व्यक्त करने में सक्षम हैमौके पर उन्होंने संस्थान के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रसंशा की| उन्होंने बताया की सूरत शहर का विश्व हिन्दी दिवस का यह पहला कार्यक्रम है जो  सूरत शहर के अन्य कार्यालयों के लिए प्रेरणा श्रोत है| उन्होंने यह भी कहा की वह सूरत शहर के अन्य कार्यालयों को भी विश्व हिंदी दिवस मनाने के लिए प्रेरित करेंगे| निदेशक व कुलसचिव ने आयोजित कार्यक्रम की आवश्यकता को बताया और भविष्य में ऐसे और भी कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे ऐसी घोषणा की|


                       विश्व हिन्दी दिवस के शुभ अवसर पर संस्थान की पत्रिका “ध्वनि” प्रथम संस्करण  का विमोचन किया गया| इसमे राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रम प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं व अन्य सभी गतिविधियों के सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी है |इसके आलावा संस्थान से जुड़े अन्य आवश्यक जानकारीयों  के साथ साथ यह साहित्य व मनोरंजन का एक अच्छा मध्यम है| इसके संपादक चन्द्रशेखर प्रसाद एवं यश राज चौधरी हैं| जिन्होंने अपनी सोंच को “ध्वनि” के मध्यम से नया आयाम दिया| साथ ही देश के सुप्रसिद्ध कवियों के स्वरचित कविताओं के संग्रह “काव्य कुम्भ” एलबम (सी.डी.) जिसमे संस्थान के छात्र चन्द्रशेखर प्रसाद(सदस्य राजभाषा प्रकोष्ठ)की भी स्वरचित कवितायें है| अतिथियों के कर-कमलों से “काव्य कुम्भ” एलबम (सी.डी.)का भी लोकार्पण किया गया| समारोह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिता के विजेताओं को मंचासीन अतिथियों  के कर कमलों द्वारा पुरस्कृत किया गया, जिसमे राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा कुल 87 हजार रुपये कि नकद राशि का वितरण किया गया| साथ ही राजभाषा प्रकोष्ठ के द्वारा डिजाइन किय गये नये वर्ष के कलेन्डर, प्लानर का भी विमोचन किया गया| अंत में सभी अतिथियों को भेंट देकर धन्यवाद ज्ञापन के साथ विश्व हिंदी दिवस समारोह संपन्न हुआ| मंच संचालन की भूमिका
चन्द्रशेखर प्रसाद निभा रहे थे |

“हिंदी सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण कार्यशाला” (21-25 अक्टूबर 2013) सम्पन्न :

                हिन्दी हमारी राजभाषा है एवं इसका ज्ञान हम सभी को होना चाहिए इसी उदेश्य को ध्यान में रखते हुये सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौघोगिकी संस्थान,सूरत के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) सूरत  के सहयोग से पांच दिवसीय “हिंदी सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण कार्यशाला” का आयोजन 21 से 25 अक्टूबर 2013 को किया जा रहा है|


                सोमवार 21 अक्टूबर 2013 को इस कार्यशाला का उद्घाटन किया गया समारोह में मुख्य अतिथि पद पर गुंजन मिश्रा (मुख्य आयकर आयुक्त एवं नराकास अध्यक्ष) विशिष्ट अतिथि पद प्रसेनजीत सिंह (आयकर आयुक्त (अपील) एवं राजभाषा अधिकारी) एवं डॉ माणिक मृगेश (पूर्व सचिव नरकास बड़ोदरा) संस्थान के कुलसचिव एच.ए.परमार, का. हिंदी अधिकारी डॉ. के.डी. यादव मंचासीन थे | कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन करके किया गया| मौके पर डॉ. के. डी. यादव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की जिसमे उन्होंने विस्तारपूर्वक अगले पांच दिनों तक होने वाले कार्यक्रमों का समूचा विवरण दिया | मंच सञ्चालन करते हुए चंद्रशेखर प्रसाद ने कहा वैश्वीकरण के इस दौर में जहाँ भाषाएँ और संस्कृतियाँ अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है,वहां भारतीय संस्कृति और हिंदी नित नए सोपानों को छूकर अपना विशिस्ट स्थान हासिल कर रही है| राजभाषा प्रचार–प्रसार हेतु आयोजित कार्यशाला के उद्देश्य को आलोकित किया|


                             मुख्य अथिति श्रीमती गुंजन मिश्रा ने कहा कि कोई भी भाषा में काम करने के लिये सबसे जरूरी है कि आप को उस भाषा पर स्वाभिमान होना चाहियेI अधिकतर समय हम अंग्रेजी का इस्तेमाल सिर्फ दिखावे के लिये करते हैंएस.वी.एन.आई.टी. सूरत ऐसे कई सफल राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित कर चुके है|इसके लिए मैं सभी प्रशासनिक एवं हिंदी अनुभाग से जुड़े अधिकारीयों को बधाई देती हूँ| विशिष्ट अतिथि श्री प्रसेनजीत सिंह जी ने कहा है कि यह कार्यशाला नराकास के सदस्यों के लिये यह बहुत उपयोगी है एवं राष्ट्रीय प्रौघोगिकी संस्थान, एवं नराकास सूरत के द्वारा किया जा रहा सराहनीय प्रयास है| इसलिए सभी प्रतिभागियों को इस कार्यशाला का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए| डॉ माणिक मृगेशने कहा कि हिन्दी को  मजबूत  तथा प्रभावी बनाने के लिये किसी भी भाषा के शब्दो का इस्तेमाल किया जा सकता है उसके लिये शुद्ध हिन्दी का ज्ञान होना जरूरी नहीं है | हिंदी को बढ़ावा देने के लिए आज अच्छी सोच एवं दिल से प्रयास करने की जरुरत है | कुलसचिव एच.ए.परमार ने कहा कि हमारे संस्थान द्वारा  हिंदी के क्षेत्र में उच्य स्तरीय कार्य किया है इसलिय संस्थान को गोल्डन जुबली वर्ष में “गोल्डन पीकोक“ सम्मान पुरस्कार की मानक उपाधि से अलंकृत व विभूषित किया गया था | बेहतर और भी बेहतर करने हेतु हमारा प्रयास जारी रहेगा| कार्यशाला में विषय-विशेषज्ञ के रूप में राजेन्द्र वर्मा(सहायक निदेशक,गृह मंत्रालय राजभाषा विभाग पुणे) ने कार्यशाला में सभी ओ.एस. में यूनिकोड सक्रीय करने के तरीके को बताया|  


          
                             उद्घाटन समारोह संपन्न होने के पश्चात कार्यशाला निर्धारित रूप-रेखा के अनुसार चल रही है| इस कार्यशाला में भारत सरकार के राजभाषा से जुड़े विभिन्न राजभाषा नीति नियमोंव्याकरणिक भूलें एवं समाधान देवनागरी लिपि एवं मानक वर्तनी एवं अर्धसरकारी पत्र, टिप्पणी लेखन एवं कार्यालय ज्ञापन,परिपत्र एवं सरकारी पत्र किस तरीके से लिखा जाए,लिखते समय किन-किन बातों का ख्याल रखना चाहिए जेसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी साथ ही आवश्यकतानुसार संवंधित सॉफ्टवेयर का  प्रशिक्षण दिया जायेगा और आखिरी दिन प्रतिभागियों के बीच सिखाये गए विषयों से संवंधित परतियोगिता का भी आयोजन किया जायेगा | जिसमे प्रथम, द्वितीय,तृतीय व दो सांत्वना पुरस्कार होंगे जिसकी राशि क्रमशः 2500,2000,1500, 1000 व 1000 रुपये होंगे |इस राष्ट्रीय कार्यशाला में संस्थान के  समिति सदस्यों, नराकास सदस्यों सहित कुल 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया 

Saturday, September 14, 2013

हिंदी पखवाड़ा (2013) सम्पन्न :

संस्थान के नए शैक्षणिक सत्र के पहले उत्सव का नाम है हिंदी पखवाड़ा | प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौधोगिकी संस्थान –सूरत के राजभाषा विभाग  द्वारा हिंदी प्रचार-प्रसार नीति के तहत राजभाषा प्रकोष्ठ (हिन्दी सेल) इसे प्रतिवर्ष सितम्बर माह के प्रथम पखवाड़े अर्थात 1-14 सितम्बर को आयोजित करता है जिसमें भिन्न-भिन्न प्रकार के कई कार्यक्रम तथा प्रतियोगिताएँ छात्र/छात्रा तथा संस्थान परिवार (अधिकारी, कर्मचारी, स्कूल के बच्चे इत्यादी) दोनों श्रेणियों में आयोजित किये जाते हैं| उदघाटन समारोह सम्पन्न होने के पश्चात् सितम्बर को  तर्क युद्ध आयोजित किया गया| इसमें प्रतिभागी को पक्ष-विपक्ष दोनों में बोलना होता है तथा घण्टी बजने पर अपना मत परिवर्तन करना होता है| इसमें पहले सोचने फिर बोलने के लिए 3 -3 मिनट का समय दिया गया| छात्रों में प्रखर वक्ता की छवि देख सभी हतप्रभ थे| साथ ही श्रुतलेख प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था जिसमे संस्थान के 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया |
                           
                  4 सितम्बर  को  छात्रों की वाकपटुता का अवलोकन करने के लिए भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया थाइसमे एस.वी.पी. विद्यालय के छात्रों ने भी बड़े उतसाह के साथ भाग लिया | 6 सितम्बर को  प्रश्नोत्तरी (क्विज) तथा निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | खचाखच भरे हॉल में करीब 400 प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर हिंदी के प्रति अपनी अभिरुचि दिखाई | प्रश्नोत्तरी में  60मिनट में पचास प्रश्न दिए गए थे जो विभिन्न श्रेणियों में थे| साथ ही निबंध प्रतियोगिता में सबकी अवलोकन क्षमता तथा अभिव्यक्ति को परखा गया | 8 सितम्बर को नजरिया (स्लाइड शो) का आयोजन किया गया जिसमें कुछ वीडियो तथा चित्र देखकर उसके बारे में अपने विचार लिखने थे | कुछ सामान्य ज्ञान तथा कल्पनात्मक प्रश्न भी दिए गए थे | इंजीनियरिंग कर रहे विद्यार्थियों के अंदर छिपे कला को बहार लाने के लिए चित्रकला प्रतियोगिताका भी आयोजन किया गया था | यह प्रतियोगिता स्कूली छात्रों के लिए भी आयोजन किया गया |सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत सितम्बर के शाम को साथ ही अभिव्यक्ति (नाटक) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया इसमे समूहों ने हिस्सा लिया | साथ ही 13  सितम्बर को सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम छात्र कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया | जिसमें कुल 14 छात्र कवियों ने भाग लिया | इसमें अभियांत्रिकी छात्रों में छिपे कवियों का जौहर सामने आया | सभी रसों के संगम में गोता लगाते दर्शकगण दाद देने व तालियाँ बजाने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे | काव्य रस की यह धारा देर शाम तक बहती रही एवं श्रोता इसकी अमृत वर्ष में देर शाम तक भींगते रहे| अंत में सभी कवियों को पुरस्कृत भी किया गया |


 14 सितम्बर, दिन शनिवार को हिंदी दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया| इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.एस.डी.शर्मा (विमानपत्तन निदेशक,सूरत) संस्थान के कुलसचिव एच.ए. परमार एवं कार्यकारी हिन्दी अधिकारी डॉ. के.डी.यादव मंचासीन थे| सर्वप्रथम डॉ. के.डी.यादव ने अपने स्वागत भाषण में विगत वर्ष के आयोजित कार्यशालाओं,गतिविधियों एवं प्रतियोगितों से लोगों को अवगत कराया साथ ही स्नेह व सम्मान युक्त शब्दों से अतिथियों का स्वागत किया| मुख्य अतिथि ने राजभाषा हिन्दी के विषय में चर्चा की साथ ही संस्थान के द्वारा हिन्दी प्रचार-प्रसार के लिए कर रहे प्रयासों के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा की |


                        डॉ.शर्मा ने बताया की हिन्दी के प्रचार प्रसार में फिल्मों का बहुत बड़ा योगदान है लेकिन हिंदी भाषा के प्रयोग से वे धनार्जन भी करते है साथ ही लोकप्रिय भी बन जाते है परन्तु ‘फिल्म फेयर अवार्ड समारोह’में मंच पर जाके अंग्रेजी में बोलते है यह उन्हें शोभा नहीं देता| साथ ही उन्होंने कुछ व्यंग युक्त कवितायें सुनाकर लोगों का खूब मनोरंजन भी किया |
मंचासीन अतिथियों के कर-कमलों से राजभाषा प्रकोष्ठ की वार्षिक पत्रिका सम्मुख के चतुर्थ संस्करण का भी लोकार्पण किया गया | हिंदी पखवाड़ा में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विभिन्न  विजेताओं को डॉ. शर्मा के कर-कमलों से पुरस्कृत किया गया|जिसमें प्रथम,द्वितीय,तृतीय पुरस्कार की राशि क्रमशः 2500, 2000, 1500 रुपयों के साथ-साथ दो सांत्वना राशि 1000 रुपये थे| प्रतिभागियों के बीच कुल 1 लाख 26 हजार रुपये की राशि वितरित की गयी| कुलसचिव ने हिदी के महत्व को बताते हुए लोगों को हिंदी में कम-काज करने हेतु प्रेरित किया साथ ही यथा संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया |

                            इस कार्यक्रम को यादगार रखने के लिए अतिथियों को स्नेहयुक्त मोमेंटो भेंट देकर उनका आतिथ्य किया गया | अंत में डॉ के.डी.यादव के द्वारा आगंतुक अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन के साथ-साथ हिंदी पखवाड़ा प्रबंधक चन्द्रशेखर प्रसाद एवं यश राज चौधरी के सराहनीय सफल प्रयासों का प्रशंसा करते हुए उनके उज्जवल भविष्य हेतु कमाना किया| मंच संचालक की भूमिका चन्द्रशेखर प्रसाद एवं सुरभि अग्रवाल निभा रहे थे |