Thursday, September 1, 2011

KAHIN KHO NA DUN TUMHEN (कहीं खो न दूँ तुम्हे):


                           
                             मैं  जब  भी  एकांत  होता  हूँ ,
ढुंढता हूँ खुद  को ,
कपोल कल्पना  की  हसीन   दुनियां  में ,
चुपके  से  धीरे -धीरे ,दबें  पांव ,
मन  के  कोने  अंतरे  ,
सरिक  होती  है  स्मृति -पटल  पर ,
आहिस्ताआहिस्ता ,
स्मृतियों   में   नया  आयाम  लाती  है ,
तेरी  मधुर  स्मृतियाँ |
और  याद  हो  आती ,
विरह - मिलन   की वो  बातें |
वो  स्वपनिल  सौगातें ,
खिला  हुआ  तेरा  मनमोहक  चेहरा ,
छा  जाती  है  इन  स्वपनिली  आँखों   में |
जब से मिले  हो  तुम  ,
अपनी  पहचान   खो बैठा  हूँ |
मुझ   में तू  ,और  तुझ  में  खुद  नजर  आता  हूँ  |
हर -पल , हरछन ,होता  है  मेरे  साथ  तेरी ,
मौजूदगी   का  हसीन एहसास |
पवन  के सनन  -सन  संग     होता है ,
तेरी अनोखी  महक  का अभास |
यकायक   गायब   हो जाती है ,
मस्तिष्क  से तुम्हारी  प्यारी  छवी  |
एक भयावह  खौफ  से भर  उठता  हूँ  ,
इस  द्वन्द  में , कहीं   खो दूँ  तुम्हें  ...............||


                                              -  चन्द्रशेखर प्रसाद
                                                                                                
                                               
                                  


Friday, August 26, 2011

LAL GULAB (लाल गुलाब):



 खून चूसा अवनी का ,रक्तमयी खुनी गुलाब ,
अवनी की उदरदरी से उपजा,अवनी को तरपाया लाल गुलाब  |
आसमान के आंसू पर ,विहँसता खिलता गुलाब,
सूर्यकिरण में  चमकता ,उसपर भी इतराता गुलाब |
माली जीवन उपवन के ,मुस्काता हर्षाता  देख गुलाब,
मानव तेरे जीवन में भी ,बस मृग तृष्णा है गुलाब |
मानव तुमको आकर्षित करता,सुन्दर से सुन्दरतम गुलाब,
भागता तू सुन्दरता के पीछे ,न सोचा क्यों सुन्दर है गुलाब |
जग में जो सुन्दर होता ,मोहता मन को जैसे गुलाब,
कपटी काया निर्मित माया ,ललचाता तरसता छलिया गुलाब |
कांटे तो उसके रक्षक हैं ,उसे भी उपहसित करता गुलाब,
थाम लेते जो दमन को ,है भले भोगी है गुलाब |
पवन के सनन से ,अगरता है गरबिला गुलाब ,
भूल गए अपनो के अगणित ,उपकारो को कृतघ्न गुलाब |
     दर्द-ए-दिल आशिकों की , मुहब्बत का निशान है गुलाब ,
कराहती आत्मियता दारुण व्यथा,सहमति मानवता की पहचान है गुलाब| 

                                       - चन्द्रशेखर  प्रसाद 

NETA AUR PREMIKA (नेता और प्रेमिका) :


 नेताओं की तरह प्रेमिकाएं भी,
आश्वासन देने की कला मैं सिद्ध हस्त हैं,
मजनूं जितने प्रतीक्षा मैं त्रस्त हैं,लैलाएं उतनी ही मस्त हैं |
नेताओं की तरह प्रेमिकाएं भी,एक मजबूत मंच चाहती है,
आँख का अँधा, गांठ का पूरा हो,ऐसा प्रेमी टंच चाहती है|


नेता और प्रेमिका मैं एक ही विसमता  है,
नेता बहुत बोलता है, चुप रहना प्रेमिका की विवसता है|
नेता बूथ कैप्चर करता है, प्रेमिका यूथ कैप्चर करती है|

नेता करवाता है दंगा, प्रेमिया करवाती है पैसों से नंगा,
नेता जनता का भरोसा तोड़ता है,प्रेमिका प्रेमी का दिल तोड़ती है|
नेता भीड़  साथ ले कर चलता है, प्रेमिका अकेले ही दौड़ती है|
और उसके पहले पूरी तरह निचोरती है|

नेता दल बदलता है, प्रेमिका दिल बदलती है,
नेता झंडा दिखता है, प्रेमिका रुमाल हिलती है,
नेता को दूर की सूझती है, प्रेमिका को हरी-हरी सूझती है,
नेता आकर मांगे चंदा, प्रेमिका फांसे बन्दा |

क्या करें दोस्तों आज के युग में ,
नेता और प्रेमिका का यही है धंधा ?

                                                               - चन्द्रशेखर प्रसाद                           
                                                            

Thursday, August 25, 2011

KOI APANA LIYE SAPANA (कोई अपना लिए सपना):



मेरी  माँ  मुझको  प्यारी ,सबसे   न्यारी  है  वो ,
करुणा  की  मूरत, ममता  का  सागर,  प्यार का गागर  है वो |
जो  रोज  सुबह  मुझे  जगाती  ,ब्रश  कराती ,
रगर - रगर कर  मुझको  नहलाती ,
खूब  खिलाती  दूध  पिलाती ,
गृहकार्य  मुझको है करवाती ,
पलक  झपकते  ही  कर देती  है मुझको तैयार  |
नास्ता  देकर  मुझे स्कूल  पहुंचती ,
फिर  वापस  लाने  जाती .
खाना  खिला  कर खेलने  भेजती, 
शाम  होते  मुझे  बुलाती ,  पढ़ातीलिखाती,
 खिलाती -पिलाती, सुलाती  - जगाती |
मेरे  ही  सुख  की खातिर  वो  है  कष्ट  उठती
मेरे ही सुखमय  जीवन  हेतु
आशाएं  है  संवारती ,
केवल  एक  विश्वास   के  सहारे ,
नयी आशाओं की किरण   निहारती
उनकी दया  करुणा कभी  कम खत्म होती
इसीलिए ,
मैं  अपनी  माँ  की महिमा  गा -गाकर ,
उनकी  आस्था  का  आदर  करता  हूँ |
अपनी  मंजिल   पाने  को ,
सदा  प्रयासरत्त  रहता  हूँ  |
उन्होंने  मुझे जन्म  दिया ,
पाल -पोष कर बड़ा किया | 
 मैं उनका सदा आभारी हूँ,
मैं  उनका  बड़ा  आभारी  हूँ  ...............||||

                                                  
            चन्द्रशेखर प्रसाद 



APANA PARIWAR (अपना परिवार) :


                     अपना  परिवार है  अति  सुन्दर ,शोभा  इसकी   सबसे  बेहतर |
वातावरण  है इसका ऐसा  ,शांति    भवन  हो  जैसा ||

पिता  - पुत्र  में  प्रेम  है  ऐसा  , भक्त -भगवान में हो  जैसा |
भाई  -बहन  में प्रेम  है  कैसा ? दीपक –पूजा –चन्दन   में   जैसा ||

घर  के  बच्चे  सज्जन  सारे , लगते  है  सबको  प्यारे  |
कभी  न  किसी  से   झगरा  करते ,रहते  हैं  मिलजुल  कर  सारे  ||

बच्चा  होता  प्यार  का  भूखा ,माता -पिता  होता इसका   दाता |
हमको  सबसे प्यार है कैसा  ? मछली   को पानी  से जैसा ||

माता  बनी  स्नेह  की  मूर्ति ,और  है वो  करुणामयी |
ऐसा  लगता  है जैसे  , यहाँ  हो  कोई  दयामयी ||

हम  सबमें  प्रेम  है इतना  ,सागर  में सलिल  हो  जितना  |
दादा–पोता  में  प्रेम  है कैसा ? गुरु –शिष्य   में  होता  जैसा ||

ध्यान  लगा  कर  पढ़ते  लिखते ,खाते- पीते , हँसते -  गाते |
हम  सब   अनुसासन  में ही   रहते ,सबकी  सेवा  तन-मन  से  करते  ||

हम  सब का  लक्ष्य  है ऐसा ,गाँधी- सुभाष- कलाम  के  जैसा |
दादा  जी  की  बस  एक  ही  इच्छा ,मेरा  पोता  हो सब से अच्छा ||



                              
                                                     चन्द्रशेखर प्रसाद









HUM BUS DEKHATE RAHE (हम देखते रहे.... ):

ओ गोरी अजनबी कलि तू ,चला गयी दिल पे छुरी |
ऐसे पीछे मुड़ी  जा आगे ,नजरों से घायल कर गई ||
कातिलाना अंदाज उनके,जुल्फ घनेरी काली - काली |

 उड़े  गुलाबी गलों पे ,संभालते  कर ||
चाँद सा चेहरा रौशन , आँखे नीलम - नीलम सी |
माथे पे चमक , तन पे रौनक ,मचाये दिल में हलचल ,
गोरा मुखरा, जिस्म सुनहरा ,नैनों  से छलके है मदिरा ||
कानों में बाली,होठ पे लाली,चाल अजब मतवाली |
हर पल - हर छन,पवन करे सनन-सन ||
मचलता है मन, सुन कर पायल की छमक - छम |
कंगन की खनक – खन से , बढ़ गई मेरे दिल की बेकरारी ||
बिन पिए चढ़ गई खुमारी , क्या बताएं वो बेताबी का आलम ?
में डूब गया इश्क की गहराई में ,में खो गया एहसास की परछाई में ||
में दे रहा था खुद को दुहाई ,  गौरतलब है उसकी जुदाई में |
अब सुकून-ए-दिल परछाई पाने को , कायनात के उस क़यामत को ||
हम तड़पते  रहे ,  रूहतलक , हम देखते रहे  |
हम बस देखते रहे ...................|| 
.                       .
 .                     . 
.                   .

क्योंकी वो हमारी सीनियर  थी ......!!!!