Thursday, March 22, 2012

RAJBHASHA PRABHARIYON KA SAMMELAN (राजभाषा प्रभारियों का सम्मलेन ):


नगर राजभाषा कार्यान्वय समिति उपक्रम की ओर से पश्चिम क्षेत्र गुजरात -महाराष्ट्र - गोवा के राजभाषा प्रभारियों का सम्मलेन गुजरात रिफाइनरी टाउनशिप के कम्युनिटी हॉल में आयोजित हुआ |


सम्मलेन का उद्घाटन संसदीय राजभाषा समिति की प्रथम उप समिति के संयोजक व       संसद राजेंद्र अग्रवाल किये | विशेष अतिथि भारत सरकार के राजभाषा विभाग के संयुक्त सचिव डी. के. पांडेय,गुजरात रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक प्रभारी व नगर राजभाषा कार्यान्वय समिति (उपक्रम) के अध्यक्ष पृथ्वी शुर  थे |

ओ एन जी सी के भौतिकी विभाग के महाप्रबंधक ए के द्विवेदी सम्मलेन के प्रथम दिन यूनिकोड सोफ्टवेयर व सूचना प्रद्योगिकी से जुड़ी जानकारियों से लोगों को अवगत कराया  |




इस अवसर पर समिति के सदस्य सचिव डॉ माणिक मृगेश कृत अनुप्रयुक्त राजभाषा पुस्तक का विमोचन भी किया गया एवं राजभाषा सम्मान पुरस्कार दिए गए | दूसरे दिन राजभाषा विभाग (मुंबई ) के उप निदेशक कि अध्यक्षता में राजभाषा कार्यान्वयन की भविष्य कि चुनौतियों पर विचार विमर्श किया गया और कवि सम्मलेन के बाद कार्यक्रम सम्पन्न हुआ |


मौके पर सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान ,सूरत के राजभाषा विभाग के  सचिव डॉ के डी यादव  एवं सह सचिव  चन्द्रशेखर प्रसाद अपने संस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे | 

SENSETION AWAKENING WORKSHOP (सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में दो दिवसीय संवेदना जागृति कार्यशाला का आयोजन ):


सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,सूरत के बैनर तले हिंदी प्रचार- प्रसार कार्यक्रम के अंतर्गत दो दिवसीय संवेदना जागृति कार्यशाला रविवार को धूमधाम से संपन्न हुई समारोह मे मुख्य अतिथि पद पर श्री हीरालाल यादव जी एवं विशिष्ट अतिथि पद पर 5 गुजरात बटालियन कर्नल विमल मलिक विराजमान थे |.इनके अलावा निदेशक डॉ. पी. डी. पोरे , कुलसचिव डॉ एच. ए. परमार , कार्यक्रम के संयोजक का. हिंदी अधिकारी डॉ. के. डी. यादव मंचासीन थे |



कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन किया | तद्पश्चात डॉ. के डी यादव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की | मौके पर मुख्य अतिथि ने हिंदी की उपयोगिता के संदर्भ मे कई तथ्यों को प्रस्तुत किया | साथ ही विशिष्ट अतिथि ने कहा आज की परिस्थितियों में विज्ञान व् हिंदी का विकास दोनों ही महत्वपूर्ण है साथ ही व्यक्ति के समुचित विकास हेतु उनकी संवेदनाओं को जीवित रखना आवश्यक है जो ऐसे कार्यक्रम के द्वारा ही संभव है ” |कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. हीरालाल यादव ने समाज में जागृति लाने के लिए समाज के कुछ संवेदनशील पहलुओं को आलोकित किया | इस कार्यक्रम के केंद्र बिंदु भारतीय रक्षा तंत्र एवं आतंकवाद, सामाजिक कुरीति (कन्या-भ्रूण हत्या), राजभाषा (हिंदी) एवं पर्यावरण (ग्लोबल वार्मिंग) थे | साथ ही उन्होने कई वीर जवानों जिन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया है उनके अंतिम खत पढ़े, जो विभिन्न युद्धों के दौरान शहीद हुए थे | साथ ही उनके परिजनों से फ़ोन द्वारा एवं ऑनलाइन बातचीत हुई | सभी ने उनके माता-पिता को आश्वासन देते हुए ये एहसास दिलाया कि पूरे देश को उनपर नाज़ है और आज देश को उनके जैसे सपूतों की जरुरत है | कन्या भ्रूण हत्या के सन्दर्भ में वार्ता के दौरान हीरालाल यादव जी ने कहा कि अगर स्व. कल्पना चावला के माता पिता ने भी ऐसा सोचा होता और एक कन्या को जन्म नहीं देते तो क्या देश को कभी कल्पना चावला जैसी अंतरिक्ष यात्री मिल पाती ?पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने हेतु ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम एवं बचाव जैसे मुद्दों पर खूब मंथन किया गया | साथ ही विषय से जुड़े पहलुओं को प्रदर्शनी के माध्यम से भी रु-ब-रु किया गया फिर संस्थान के प्रथम वर्ष के ( स्वीटी ,पूजा ,जीतेन्द्र ,कल्याणी ,पल्लवी ,प्रिया ,यूनिस ,विजय ,उषा ,ज्योत्सना ,ऐश्वर्या, रूचि ) छात्र -छात्राओं ने चन्द्रशेखर प्रसाद एवं परमानन्द सागर निर्देशित "कन्या भ्रूण हत्या "रोकने हेतु संदेशयुक्त “बेटी बचाओ“ लघुनाटक का भी मंचन किया |कार्यशाला के अंतर्गत उपर्युक्त विषयों पर आयोजित अनेक प्रतियोगिताओं में विभिन्न विद्यालयों एवं कालेज से आये छात्र छात्राओं ने सक्रियता दिखाई |इस कार्यशाला में लगभग 200 प्रतिभागी शरीक हुए | अंत मे पुरस्कार वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ |मंच संचालक की भूमिका कार्यक्रम के सह- संयोजक - चन्द्रशेखर प्रसाद निभा रहे थे और इसमें यशराज चौधरी और परमानन्द सागर उनका साथ दे रहे थे |


Monday, November 28, 2011

UMMID-E-INTAZAR (उम्मीद -ए–इंतजार) :




बेखबर  उन  अंधेरों  से , कभी  हम  भी  संग  तेरे ,
 कुछ  ख्वाब   बुना  करते  थे  |
तेरी  बाँहों  को  थाम  बेख़ौफ़  चला  करते  थे ,
तेरे आने  की  आश  में ,

इंतजार की घड़ियों  का  मिनट  साल  लगता  था ,
गुस्से   से  मेरा  चेहरा  लाल   लगता था,और   तेरे आने से,
जैसे  नदियों  की धाराओं  में  रफ़्तार आयी थी   |
दिन  जल्दी- जल्दी  ढल  कर  सुनहली  शाम  लायी  थी |



भवरों  का गुन - गुनना ,फूलों  का मुस्कुराना ,
तितलियों  के  संगीत और ऊपर  से तेरा  इठलाना    हाय !
प्रभामंडल  में  एक चमक  का संचार  लाती  थी ,
तू  हाथ  थाम  मेरे  सीने  पर  सर  रख ,
घंटों  बाते  लड़ाती  थी ,देर  हुई  बहुत ,
अभी  जाना  है जल्दी कह  ,घबरा  सी  जाती   थी |

में तेरे इन  झील   सी निगाहों   में,डूब  जाता  था,
आँखों  को झपकाकर  ,तेरा मुस्कुराना  ,हमें  खूब  भाता   था |
घंटों  बातें  करते , खोकर   उन सतरंगी  दुनियां  में,
हम भी रख सर गोद  तुम्हारे  ,तुम्हें  निहारा  करते थे |

कभी तुझमे  चाँद  तो कभी चाँद  में तुम  नजर  आते  थे ,
प्रियतम   सच  कहना  गुस्ताखी    होगी ,
उस  रुपिन  चांदनी  को मेरे प्रति  उदासी  होगी |
कि,चाँद में अगर  दाग   होती, तेरी उपमा  उससे होती |

जिन्दगी  संगसंग   जीने  के अरमान  थे हमारे ,
हर  पल  जिसे  अपना  माना  वों  नाम  थे  तुम्हारे,
जिसे महसूस  किया  ख्वाबों   में,वो  हसीन एहसास  थे तुम्हारे  |
छोड़  कर हमे  अकेला  इस  जीवन  में,जाने  तुम कहाँ  चले  गए ,

आज  भी तन्हा  दिल   खोया  है,उम्मीद-इंतजार में  ,
तुम एक दिन जरुर लौट आओगी,अपने दीवाने की दीदार  में...!!
                                                 
                                   -  चन्द्रशेखर प्रसाद

Wednesday, November 2, 2011

BHINGE NAINO SE DEKH RAHA (भींगे नैनो से देख रहा ):




कसमकस जिन्दगी की ,स्मृति पटल पर करती नर्तन |
क्षतविक्षत मानवता दर्शन ,संस्कृति हीन अंग प्रदर्शन ||


त्रस्त नयन मुख कल्पित काया ,है सुख - दुःख , धुप -छाया |
सुन -सुन बम गोले की गर्जना ,मौन भी खोलता मुखड़ा ||



क्षुब्द अंक डोलता ,शोषित अंग कराहता |
नेता मंत्री सराहता ,सब दर्शक दंग रहा ||



डर कर आप में मग्न हुआ,कहीं भूख की खातिर नग्न हुआ |
कितने अपने-अपनो से दूर हुए,कुछ हैं फैशन में चूर हुए ||



कोई अपनो से मिलाने को तरपे,कितनों ने अपनो को भुला दिया |
आदमी आदमी को पहचान सका,भीड़ में खो गई आदमियता ||


उदिघ्न मन बेक़रार धड़कन ,भींगे नैनो से देख रहा |
भींगे नैनो से बस देख रहा ………………………..||
             

                                   -  चन्द्रशेखर प्रसाद

Monday, October 10, 2011

KAVI SAMMELAN (सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में काव्य संध्या का आयोजन):




सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,सूरत के बैनर तलेप्राकृतिक उर्जाओं का संरक्षण एवं  उपयोग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला व् हिंदी प्रचार- प्रसार कार्यक्रम  के अंतर्गत काव्य-संध्या  का भी आयोजन किया गया |

मौके पर उपस्थित डॉ प्रदीप कुमार सिंह देव ने अपनी कविता अंग्रेजी का बुखारमें कहा : जो हिंदी में नाक पोछना नहीं जानते ,वो भी सॉरी,प्लीज,थैंक्यू बिना बोले नहीं मानतेसुरेश प्रसाद सिंह श्वेताभने बड़े ही शालीन अंदाज में कहा : जुल्फों की घटाओं की तरफ खोल दो बाहें ,ये रात महक जाये करो प्यार की बातें|मंच संचालन में साथ दे रहे चन्द्रशेखर प्रसाद ने उम्मीद-ऐ इंतजारमें शमां बंधाते हुए कहा: बेखबर उन अंधेरों से,कभी हम भी संग तेरे,कुछ ख्वाब बुना करते थे /तेरी बाँहों को थाम बेख़ौफ़ चला करते थे /हम भी रख सर गोद तुम्हारे,तुम्हें निहारा करते थे /कभी तुझमें  चाँद तो कभी चाँद में तुम नजर आते थे|” 

वहीँ दूसरी ओर परिस्थिति के बिपरीत राहुल रंजन ने कहा:इन लम्हों के दामन में,उमर के इस सावन में,प्रीत के इस चिलमन में,कबतक तरपाओगी,जाने तुम कब आओगी ?फिर मृत्युंजय मिश्रा ने माहौल बदलते हुए फ़रमाया :नजरों का छुपछुप के मिलाना,आँखों का आँखों को पढ़ना /ऊपर से तेरा शर्माना,अब तक मुझको याद है/सालों पहले की बात है और उर्मिला उर्मी  ने अपने सुरीले स्वर में गीती रचना :गैर के हिस्से का आकाश न देना मुझको /टूट जाये वो विश्वास न देना मुझकोगाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दी|

मंच संचालन करते हुए संजय लोढा लोगों को हँसा हंसा कर लोट-पोट कर दिया साथ ही आतंकवाद के खिलाफ कहा :इस देश की जनता इंसाफ चाहती है ,आतंकियों  के खिलाफ अमेरिका जैसी करवाई चाहती है|काव्य के इस अमृतवर्षा में सभी श्रोता देर शाम तक मंद मंद भींगते रहे....और अंत में का. हिंदी अधिकारी डॉ. के डी यादव मंचासीन लोगों को मोमेंटो देकर सभी का धन्यवाद ज्ञापन किये |